भक्ति में पर्यावरण संरक्षण का महत्व क्या है जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के अनुसार
जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की शिक्षाएं भक्ति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती हैं, जहां प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप मानकर उसकी रक्षा को भक्ति का हिस्सा बताया गया है। उनके संदेश में पर्यावरण और भक्ति का सामंजस्य स्पष्ट है, जो हमें वृक्षारोपण और स्वच्छता को आध्यात्मिक कर्तव्य बनाता है। कृपालु महाराज के प्रवचन प्रकृति की सुंदरता को राधा-कृष्ण की लीला से जोड़ते हैं, ताकि भक्त पर्यावरण को पवित्र मानें। भक्ति में पर्यावरण संरक्षण का महत्व कृपालु महाराज के कृपालु महाराज का जीवन परिचय, प्रवचन पर्यावरण को भक्ति का अभिन्न अंग बताते हैं। वे कहते थे कि प्रकृति का संरक्षण ही सच्ची भक्ति है, , क्योंकि वृक्ष और नदियां भगवान की कृति हैं। इन प्रवचनों से प्रेरित होकर भक्त पर्यावरण रक्षा में सक्रिय होते हैं। भक्ति मार्ग पर चलते हुए स्वच्छता और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, जो जगद्गुरु कृपालु महाराज का मूल संदेश है। पर्यावरण प्रदूषण को वे भक्ति में बाधा मानते थे, इसलिए उनके अनुयायी आज भी वृक्षारोपण अभियान चलाते हैं। कृपालु महाराज का आश्रम: पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली कृपालु महाराज का आश्रम वृंदावन और मंगल ल...