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Showing posts from June, 2025

कृपालु जी महाराज ने आम इंसान को भक्ति योग कैसे सिखाया

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भक्ति योग को अक्सर कठिन साधना, कठोर नियमों और लंबे धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन जगद्गुरु कृपालु महाराज ने भक्ति को आम इंसान के जीवन से जोड़कर सरल और सहज रूप में समझाया। उनका मानना था कि भगवान की प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन शुद्ध प्रेम और निरंतर स्मरण है। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि गृहस्थ जीवन जीते हुए भी व्यक्ति ईश्वर की भक्ति कर सकता है। भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाना कृपालु जी महाराज की शिक्षाओं में भक्ति केवल पूजा के समय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने बताया कि मनुष्य अपने दैनिक कार्य करते हुए भी भगवान का स्मरण कर सकता है। काम, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए मन को भगवान से जोड़ना भक्ति का सहज मार्ग है। उनकी शिक्षाओं का एक प्रमुख आधार नाम-स्मरण और संकीर्तन था। कृपालु महाराज के भजन इसी भाव को सरल भाषा और मधुर संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं। भजन और कीर्तन के द्वारा मन को सांसारिक चिंताओं से हटाकर ईश्वर के प्रति प्रेम में लगाने का प्रयास किया जाता है। मन को साधने पर दिया जोर कृपालु जी महाराज ...

प्रेम मंदिर की यात्रा – एक 12 साल के बच्चे की नजर से(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज)

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  ठंडी की छुट्टियाँ शुरू होते ही मैं बहुत खुश था। अब पूरे दो हफ़्तों के लिए ना स्कूल जाना था, ना होमवर्क करना था। मुझे लगा पापा हमको इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी दिखाने लेकर जाएंगे, लेकिन जब पापा ने बताया कि हम वृंदावन के प्रेम मंदिर जा रहे हैं, तो मेरी एक्साइटमेंट थोड़ी कम हो गई। मुझे लगा मंदिर में तो बस पूजा-पाठ होता है, मैं वहां जाकर क्या करूंगा! मैंने जब इसके बारे में मम्मी से बोला तो उन्होनें यह कहकर टाल दिया, "एक बार चलो तो, फिर देखना!" हम सुबह तैयार होकर दिल्ली से अपनी कार से ही वृन्दावन के लिए निकले। पापा कार चला रहे थे, मम्मी और मेरी बहन पीछे वाली सीट पर थी, और मैं आगे पापा के बगल में बैठ गया। रास्ते में मैं खिड़की से बाहर देखता रहा और सोचता रहा कि पता नहीं ये ट्रिप कैसी होने वाली है। पापा रास्ते में बता रहे थे कि प्रेम मंदिर   जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज  ने बनवाया है और यह राधा-कृष्ण जी और सीता-राम जी का मंदिर है।