कृपालु जी महाराज ने आम इंसान को भक्ति योग कैसे सिखाया

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भक्ति योग को अक्सर कठिन साधना, कठोर नियमों और लंबे धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन जगद्गुरु कृपालु महाराज ने भक्ति को आम इंसान के जीवन से जोड़कर सरल और सहज रूप में समझाया। उनका मानना था कि भगवान की प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन शुद्ध प्रेम और निरंतर स्मरण है। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि गृहस्थ जीवन जीते हुए भी व्यक्ति ईश्वर की भक्ति कर सकता है। भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाना कृपालु जी महाराज की शिक्षाओं में भक्ति केवल पूजा के समय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने बताया कि मनुष्य अपने दैनिक कार्य करते हुए भी भगवान का स्मरण कर सकता है। काम, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए मन को भगवान से जोड़ना भक्ति का सहज मार्ग है। उनकी शिक्षाओं का एक प्रमुख आधार नाम-स्मरण और संकीर्तन था। कृपालु महाराज के भजन इसी भाव को सरल भाषा और मधुर संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं। भजन और कीर्तन के द्वारा मन को सांसारिक चिंताओं से हटाकर ईश्वर के प्रति प्रेम में लगाने का प्रयास किया जाता है। मन को साधने पर दिया जोर कृपालु जी महाराज ...

प्रेम मंदिर की पहली झलक(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज)


 

जब हम वृन्दावन पहुंचे, तो माहौल कुछ अलग ही था। हर तरफ राधे-राधे के झंडे लगे थे, लोग भजन गा रहे थे और मंदिरों से आरती की आवाज आ रही थी। वहां पहुंचकर हम एक होटल में रुके जहां हमने दोपहर का खाना खाया और थोड़ी देर आराम किया।  

शाम को लगभग 5 बजे हम सब प्रेम मंदिर के दर्शन के लिए होटल से निकले। जैसे ही मैंने प्रेम मंदिर की पहली झलक देखी, मैं तो सरप्राइज रह गया। यह मंदिर तो मेरी कल्पना से काफी बड़ा था। बिल्कुल सफेद संगमरमर से बना मंदिर किसी महल जैसा लग रहा था! ढलते सूरज की रोशनी पड़ने से मंदिर और चमक रहा था। इतनी सफाई और सुंदरता मैंने और किसी मंदिर में नहीं देखी थी। तब मुझे लगा कि शायद ये ट्रिप उतना बोरिंग नहीं होने वाला!आगे पढ़े

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